चीन में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा बांध, भारत पर कैसा होगा असर?

चीन का ‘सुपर डैम’: तिब्बत में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा बांध भारत के लिए क्यों है एक ‘टाइम बम’?


भारत और चीन की सीमा (अरुणाचल प्रदेश) से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर तिब्बत के मेदोग (Motuo) काउंटी में चीन एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है, जिसने रणनीतिक और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह है मेदोग हाइड्रोपावर स्टेशन (Medog Hydropower Station), जिसे दुनिया का सबसे बड़ा बांध कहा जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर सोशल मीडिया और खबरों में इसे भारत के लिए एक ‘टाइम बम’ की तरह देखा जा रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह प्रोजेक्ट क्या है और भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

China Super Dam: तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन का सबसे बड़ा बांध और भारत की चिंताएं


क्या है मेदोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट?
यह विशालकाय बांध तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो (Yarlung Tsangpo) नदी पर बनाया जा रहा है। यही नदी जब भारत में प्रवेश करती है, तो इसे ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है।
* विशाल क्षमता: यह प्रोजेक्ट चीन के ही प्रसिद्ध ‘थ्री गॉर्जेस डैम’ (Three Gorges Dam) से भी लगभग तीन गुना अधिक बिजली पैदा करने की क्षमता (करीब 60 गीगावाट) रखेगा।


* रणनीतिक स्थान: यह परियोजना भारत के अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर के बेहद करीब ग्रेट बेंड (Great Bend) पर स्थित है, जहाँ नदी एक बहुत तीखा मोड़ लेती है।
भारत के लिए यह ‘टाइम बम’ क्यों है? (मुख्य चिंताएं)
इस बांध के बनने से भारत (विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम और अरुणाचल प्रदेश) को कई तरह के गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है:

China’s Biggest Dam: चीन के सबसे बड़े बांध से भारत को क्या खतरा है?


* 1. पानी का नियंत्रण और हथियार की तरह इस्तेमाल (Water Weapon):
   चीन इस बांध के जरिए ब्रह्मपुत्र के पानी के बहाव को पूरी तरह नियंत्रित कर सकता है। सूखे के दिनों में चीन पानी रोक सकता है, जिससे पूर्वोत्तर भारत में पानी की भारी किल्लत हो सकती है और खेती व बिजली उत्पादन ठप पड़ सकता है।


* 2. अचानक बाढ़ का खतरा (Flash Floods):
   अगर किसी टकराव की स्थिति में या भारी बारिश के दौरान चीन ने इस बांध से अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़ दिया, तो असम और अरुणाचल प्रदेश के निचले इलाकों में भयानक तबाही मच सकती है।


* 3. भूकंप का बड़ा जोखिम (Seismic Risk):
   यह पूरा इलाका (हिमालयन क्षेत्र) भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील है और भूकंप क्षेत्र (Seismic Zone) में आता है। यदि इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप आता है और बांध को नुकसान पहुंचता है, तो इससे आने वाली बाढ़ भारत और बांग्लादेश के लिए किसी महाविनाश से कम नहीं होगी। इसी वजह से इसे ‘टाइम बम’ की संज्ञा दी जा रही है।


* 4. पर्यावरण और पारिस्थितिकी को नुकसान:
   इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य होने से इस संवेदनशील क्षेत्र की जैव विविधता (Biodiversity) को भारी नुकसान पहुंचेगा। नदी में सिल्ट (मिट्टी) का बहाव रुकने से भारत की जमीन की उर्वरता पर भी असर पड़ सकता है।
भारत का काउंटर-प्लान क्या है?


चीन की इस ‘वॉटर हेजेमनी’ (जल आधिपत्य) का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार भी पूरी तरह सतर्क है:
* अपर सियांग प्रोजेक्ट (Upper Siang Project): भारत अरुणाचल प्रदेश में एक विशालकाय बांध और जलाशय बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
* रणनीतिक बचाव: इस भारतीय परियोजना का मुख्य उद्देश्य चीन द्वारा छोड़े गए अतिरिक्त पानी को स्टोर करना (ताकि बाढ़ से बचा जा सके) और पानी रोके जाने की स्थिति में पानी की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना है।


निष्कर्ष
तिब्बत में चीन का यह सुपर डैम सिर्फ एक बिजली बनाने का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा रणनीतिक हथियार भी है। भारत के लिए यह जरूरी है कि वह सीमा पर अपने जल-बुनियादी ढांचे (Water Infrastructure) को मजबूत करे और इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों परtransboundary नदी नियमों को लेकर आवाज उठाए।


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