कौन हैं ज्ञानेश कुमार? (Who is Gyanesh Kumar)

भारत की प्रशासनिक और चुनावी व्यवस्था में ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) एक ऐसा नाम हैं, जो पिछले कुछ समय से गूगल और सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड कर रहा है। केरल कैडर के 1988 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने देश के कई सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसलों में पर्दे के पीछे रहकर मुख्य भूमिका निभाई है।
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने से लेकर अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और फिर भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) में शीर्ष जिम्मेदारी संभालने तक, उनका करियर हमेशा चर्चा में रहा है। इसके साथ ही उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शनों (Protests) के कारण भी लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं।
ज्ञानेश कुमार का संक्षिप्त परिचय
विवरणजानकारी
पूरा नामज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar)
जन्म तिथि और स्थान27 जनवरी 1964, आगरा (उत्तर प्रदेश)
बैच और कैडर1988 बैच के IAS अधिकारी (केरल कैडर)
शिक्षा (Education)B.Tech (IIT कानपुर), बिजनेस फाइनेंस (ICFAI), पर्यावरण अर्थशास्त्र (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, USA)
प्रमुख मंत्रालयगृह मंत्रालय (MHA), संसदीय कार्य मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय
चर्चित कार्यअनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण, राम मंदिर ट्रस्ट का गठन, सहारा रिफंड पोर्टल
प्रमुख संवैधानिक पदभारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) में शीर्ष पद
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा (Early Life & Education)
ज्ञानेश कुमार का जन्म 27 जनवरी 1964 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। शुरुआत से ही पढ़ाई में मेधावी रहे ज्ञानेश कुमार ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की।
इसके बाद उन्होंने ICFAI (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया) से बिजनेस फाइनेंस की पढ़ाई की। सिविल सेवा में आने के बाद उन्होंने अमेरिका की मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (HIID) से पर्यावरण अर्थशास्त्र (Environmental Economics) में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की।
प्रशासनिक करियर के 3 सबसे बड़े फैसले
ज्ञानेश कुमार की गिनती केंद्र सरकार के सबसे भरोसेमंद और तेज-तर्रार अधिकारियों में की जाती रही है। उनके करियर के तीन सबसे चर्चित पड़ाव इस प्रकार हैं:
1. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना (Abrogation of Article 370)
साल 2019 में जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटने का ऐतिहासिक फैसला लिया, तब ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में कश्मीर डिवीजन के संयुक्त सचिव (Joint Secretary) थे। इस पूरे कानून का ड्राफ्ट तैयार करने से लेकर वहां सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था संभालने में उनकी अहम भूमिका थी।
2. अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट का निर्माण
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के गठन की जिम्मेदारी भी गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रहते हुए ज्ञानेश कुमार ने ही संभाली थी।
3. सहकारिता मंत्रालय और सहारा रिफंड पोर्टल
गृह मंत्रालय के बाद उन्हें संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव और फिर नवगठित सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) में सचिव बनाया गया। उनके कार्यकाल के दौरान ही करोड़ों निवेशकों के फंसे पैसे वापस दिलाने के लिए ‘CRCS-Sahara Refund Portal’ की शुरुआत की गई। जनवरी 2024 में वे IAS की सेवा से रिटायर हुए।
चुनाव आयोग में एंट्री और विरोध-प्रदर्शन (Protests & Controversies)
रिटायरमेंट के कुछ ही समय बाद मार्च 2024 में उन्हें भारत के चुनाव आयोग में नियुक्त किया गया और बाद में फरवरी 2025 में राजीव कुमार के कार्यकाल पूरा होने के बाद वे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की शीर्ष भूमिका में आए। उनके नाम के साथ जुड़े मुख्य विवाद और प्रोटेस्ट नीचे दिए गए हैं:
नियुक्ति कानून (CEC Appointment Act 2023) को लेकर विरोध:
सुप्रीम कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि चुनाव आयुक्तों की चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होंगे। लेकिन सरकार ने नया कानून लाकर चयन पैनल से CJI को हटा दिया और उनकी जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल कर लिया। इसी नए कानून के तहत ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति हुई, जिसका कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों (जैसे ADR) ने कड़ा विरोध किया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
EVM, VVPAT और चुनावी पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन:
चुनाव आयोग में उनके कार्यकाल के दौरान विपक्षी दलों और कई नागरिक संगठनों ने EVM की विश्वसनीयता, 100% VVPAT पर्चियों के मिलान, फॉर्म 17C के डेटा और वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में नाम काटे या जोड़े जाने को लेकर देशभर में कई बार विरोध-प्रदर्शन (Protests) किए हैं।
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